बड़वानी की कुंडिया बसावट में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस बच्चों की प्रतिभा के नाम रहा। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने सांकेतिक भाषा में वर्णमाला और राष्ट्रगान प्रस्तुत करने के साथ सामूहिक नृत्य से भी अपनी अभिव्यक्ति दिखाई।

तीन संस्थाओं ने मिलकर किया आयोजन

सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास में यह महोत्सव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और आशाग्राम ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दृष्टिबाधित बालिका अंगिता की सरस्वती वंदना से हुई।

खास बातें

  • सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास में सांकेतिक भाषा महोत्सव आयोजित
  • भावना, ज्योति, रूपाली और सोनाली ने सामूहिक नृत्य किया
  • विशेष छात्रों के लिए एक और छात्रावास का संचालन प्रस्तावित

मूकबधिर बालिकाओं भावना, ज्योति, रूपाली और सोनाली ने सांकेतिक भाषा के साथ सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। अन्य बच्चों ने भी सांकेतिक भाषा में अपनी प्रस्तुतियों के जरिए उपस्थित लोगों को अपनी प्रतिभा से परिचित कराया।

विशेष शिक्षक की नियुक्ति पर जोर

आशाग्राम ट्रस्ट के सचिव डॉ. चक्रेश पहाड़िया ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की भूमिका को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे छात्रावासों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति आवश्यक है।

डॉ. पहाड़िया के अनुसार, ट्रस्ट ने जिला प्रशासन के सहयोग से छात्रावास के भवन और परिसर को दिव्यांग बच्चों के अनुकूल तथा सुविधायुक्त बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने विशेष छात्रों के लिए एक और छात्रावास का संचालन जल्द शुरू करने का प्रस्ताव होने की जानकारी भी दी।

सांकेतिक भाषा के समावेशी स्वरूप पर चर्चा

नगर पालिका अध्यक्ष अश्विनी निक्कू चौहान ने कहा कि सांकेतिक भाषा का भारतीय संस्कृति में पुराना स्थान है और रोजमर्रा के जीवन में भी संकेतों का सहज उपयोग होता है। उन्होंने इसके आधुनिक विकास और समावेशी स्वरूप को रेखांकित किया। कार्यक्रम में आशाग्राम ट्रस्ट, सामाजिक न्याय विभाग और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।