कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में अपनी उपजाऊ मिट्टी के लिए पहचाना जाने वाला बड़वानी जिला अब ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक नई और अनूठी मिसाल बन गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित श्माँ की बगियाश् योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता के नए रंग भर रही है। इस योजना के तहत महिलाओं को निजी खेतों में फल उद्यान और उन्नत पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के एप्पल बेर ने दी नई उड़ान इसी कड़ी में, बड़वानी जिले के निवाली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम कानपुरी की 35 स्व-सहायता समूह की दीदियों ने एक अनुकरणीय पहल की है। इन महिलाओं ने श्माँ की बगियाश् योजना से जुड़कर पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से मंगवाए गए श्एप्पल बेरश् के पौधों का अपने खेतों में रोपण किया है। यह आधुनिक बागवानी प्रयोग उनके लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। महिलाओं को मजदूरी से मिला छुटकारा पारंपरिक खेती और मजदूरी पर निर्भर रहने वाली इन ग्रामीण महिलाओं के जीवन में यह पहल एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। पहले जहाँ ये महिलाएं पारंपरिक खेती से बमुश्किल 10 से 20 हजार रुपये तक ही वार्षिक कमाई कर पाती थीं और कई बार आजीविका के लिए बाहर मजदूरी करने को मजबूर थीं, वहीं अब श्एप्पल बेरश् और बागवानी से उनकी वार्षिक आय बढ़कर 1 लाख 20 हजार रुपये तक होने की संभावना है। पौधों के पूरी तरह तैयार होने और उत्पादन शुरू होने के बाद यह उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह मजबूत कर देगा। अब महिलाएं घर पर रहकर ही इन बागों की देखभाल कर रही हैं और आत्मसम्मान के साथ जीवन जी रही हैं। जैविक खेती और जल संरक्षण का अनूठा समन्वय खेती को पूरी तरह टिकाऊ और किफायती बनाने के लिए इन महिलाओं ने खेतों में जैविक खाद के उपयोग हेतु श्नाडेफश् इकाइयों की स्थापना की है। साथ ही, जल संचय के लिए विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे जरूरत के समय फसलों को पर्याप्त सिंचाई मिल सके। ग्राम कानपुरी की इन स्व-सहायता समूह की दीदियों ने अपनी कड़ी मेहनत और सरकारी योजनाओं के समन्वय से यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आधुनिक कृषि पद्धतियों के अपनाए जाने से ग्रामीण आजीविका को नई ऊँचाइयाँ दी जा सकती हैं। आज ये महिलाएं क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।