मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ग्वालियर श्री ललित किशोर के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में नालसा शिक्षा योजना 2026 के अंतर्गत मूक-बधिर दिव्यांग बच्चों के लिए ‘अनुगूंज से उद्घोष’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला न्यायालय परिसर ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को उनके कानूनी अधिकार, सुरक्षा एवं उपलब्ध विधिक सहायता की जानकारी ऑनलाइन यूट्यूब प्रसारण के माध्यम से दी गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री ललित किशोर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सच्चा न्याय तभी सार्थक है, जब समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित हो। साइन लैंग्वेज केवल एक भाषा नहीं, बल्कि बच्चों के मन और भावनाओं तक पहुंचने का महत्वपूर्ण सेतु है। कार्यक्रम में जिला न्यायालय के न्यायाधीशगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री पुष्पेन्द्र सिंह, विशेष शिक्षक, साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटर्स एवं मूक-बधिर दिव्यांग बच्चे उपस्थित रहे।
ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव श्रीमती सुमन श्रीवास्तव ने मूक-बधिर बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों तथा ‘संकेत वाणी’ ऐप के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके बाद श्री वृजेंद्र कृष्ण दास, श्री प्रमोद नायर, श्री अक्षय सोनी एवं श्री गुरमुख सिंह लांबा ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर बच्चों को उपयोगी जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के विशेष सत्र का समापन शाम 5 बजे मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर श्री जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे, प्रशासनिक न्यायाधीश एवं कार्यपालक अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर श्री जस्टिस विवेक रूसिया तथा उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश जबलपुर के न्यायाधीश श्री जस्टिस विवेक अग्रवाल की उपस्थिति में हुआ। समापन अवसर पर राष्ट्रीय गीत एवं NALSA थीम सॉन्ग का साइन लैंग्वेज में प्रस्तुतीकरण किया गया।
कार्यक्रम में मूक-बधिर दिव्यांग बच्चों ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कीं। इन प्रेरक अनुभवों के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि उचित अवसर, सहयोग और अधिकारों की जानकारी के साथ दिव्यांग बच्चे भी आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।




