कुछ साल पहले तक रीवा जिले के ग्राम भीठी के अंकित चौरसिया के लिए कमाई का जरिया वही था, जो आसपास के कई परिवारों का रहा है — नदी और तालाबों में जाल डालकर मछली पकड़ना और जितना मिले, उसी में गुजारा करना। आज वही अंकित अपने लीज पर लिए तालाब में झींगापालन कर रहे हैं और हर साल 6 लाख रुपए से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। यह बदलाव मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना से जुड़ने के बाद आया।
जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी 'सेवा संकल्प अभियान' की कहानियों में अंकित का यह अनुभव साझा किया गया है। इसमें बताया गया है कि परंपरागत रूप से मछली पकड़ने वाले एक युवक ने मछलीपालन को एक व्यवस्थित, आधुनिक व्यवसाय के रूप में कैसे खड़ा किया।
खास बातें
- ग्राम पंचायत पुरास से 1.20 हेक्टेयर का तालाब 10 साल की लीज पर लिया
- मछुआ समृद्धि योजना से एक लाख 60 हजार रुपए अनुदान और मछुआ क्रेडिट कार्ड से दो लाख रुपए ऋण मिला
- झींगापालन से सालाना 6 लाख रुपए से अधिक शुद्ध मुनाफा, 5 अन्य लोगों को भी रोजगार
पहला कदम — पंचायत का तालाब, 10 साल की लीज
अंकित ने ग्राम पंचायत पुरास से मछलीपालन के लिए 1.20 हेक्टेयर का तालाब 10 साल की लीज पर लिया। लंबी अवधि की लीज इस काम में अहम होती है, क्योंकि तालाब की तैयारी, पानी के प्रबंधन और उत्पादन का चक्र एक-दो सीजन में नहीं बैठता। इसके बाद उन्होंने मछलीपालन विभाग के सहयोग से झींगापालन का प्रशिक्षण लिया।
अनुदान और ऋण, दोनों का सहारा
झींगापालन के लिए अंकित को मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना से एक लाख 60 हजार रुपए का अनुदान मिला। इसके साथ ही मछुआ क्रेडिट कार्ड के जरिए उन्हें दो लाख रुपए ऋण के रूप में प्राप्त हुए। इन दोनों का उपयोग करते हुए उन्होंने तालाब में व्यवस्थित तरीके से मछलीपालन शुरू किया।
प्रशिक्षण और पूंजी — दोनों एक साथ मिलने का असर उत्पादन पर दिखा। विभागीय जानकारी के अनुसार अब अंकित को झींगापालन से हर साल 6 लाख रुपए से अधिक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है, यानी खर्च निकालने के बाद बची रकम।
एक परिवार तक सीमित नहीं रहा फायदा
अंकित के इस काम से उनके अपने परिवार की आमदनी ही नहीं बढ़ी। तालाब पर चल रहे कामकाज में 5 अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार का अवसर मिला है। गांव के स्तर पर यह एक छोटी इकाई है, लेकिन इसका सीधा असर कई घरों पर पड़ रहा है।
अंकित ने अपने परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है।
जिन परिवारों की आजीविका पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने पर टिकी है, उनके लिए यह उदाहरण एक व्यावहारिक रास्ता दिखाता है — ग्राम पंचायत के तालाब की लीज, विभाग से प्रशिक्षण, और योजना के तहत अनुदान व मछुआ क्रेडिट कार्ड से ऋण। इच्छुक लोग अपने जिले के मछलीपालन विभाग से योजना की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।





